"संगीत के जादूगर खय्याम: एक कालजयी सफर"
भारतीय फ़िल्म संगीत के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपने काम से एक अलग पहचान बनाई। मोहम्मद ज़हूर "खय्याम" हाशमी, जिन्हें दुनिया खय्याम के नाम से जानती है, उनमें से एक हैं। खय्याम ने अपनी अनोखी धुनों और ग़ज़लों से संगीत प्रेमियों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी। इस ब्लॉग में हम खय्याम के जीवन, करियर और उनकी धुनों की बारीकियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। खय्याम का प्रारंभिक जीवन और संगीत का सफर खय्याम का जन्म 18 फरवरी 1927 को पंजाब के राहों (अब पाकिस्तान) में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव संगीत की ओर था। उन्होंने अपने चाचा से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा ली और बाद में लाहौर जाकर उस्ताद बाबा चिश्ती के साथ काम किया। खय्याम के सपनों ने उन्हें मुंबई (तब बॉम्बे) खींच लाया, जहाँ उन्होंने 1940 के दशक में बतौर असिस्टेंट संगीतकार अपने करियर की शुरुआत की। उनकी पहली फ़िल्म "हीर-रांझा" (1948) थी, लेकिन असली पहचान उन्हें 1953 में "फुटपाथ" से मिली। खय्याम के यादगार गाने और फिल्मों का सफर खय्याम का संगीत शास्त्रीय और ग़ज़ल आधारित होता थ...