वामन अवतार की लीला: अहंकार पर विनम्रता की जीत
--- जब-जब अधर्म बढ़ता है… हिन्दू धर्मग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि जब भी अधर्म अपनी सीमा पार करता है, तब भगवान विष्णु अवतार लेकर संतुलन स्थापित करते हैं। वामन जयंती इसी दिव्य घटना का स्मरण कराती है — जब भगवान विष्णु ने वामन (बौने ब्राह्मण) का रूप धारण कर अहंकार को विनम्रता से पराजित किया। --- असुरराज महाबली का उदय त्रेतायुग में असुरराज महाबली अपार पराक्रमी और दानी राजा था। उसकी शक्ति और भक्ति से प्रसन्न होकर उसे तीनों लोकों पर अधिकार मिल गया। देवताओं को इन्द्रलोक छोड़ना पड़ा और पूरा ब्रह्मांड महाबली के प्रभाव में आ गया। लेकिन समय बीतने के साथ उसका साम्राज्य अहंकार में बदलने लगा। यही अहंकार उसके पतन का कारण बना। --- माता अदिति की प्रार्थना देवताओं के कष्ट देखकर इन्द्र ने माता अदिति से निवेदन किया कि वह भगवान विष्णु से रक्षा की प्रार्थना करें। ऋषि कश्यप और अदिति के तप से प्रसन्न होकर विष्णु ने उनके पुत्र के रूप में जन्म लिया। यही बालक आगे चलकर वामन कहलाए — एक छोटे कद का ब्राह्मण, लेकिन तेजस्वी और दिव्य आभा से युक्त। --- यज्ञ में माँगा सिर्फ तीन पग भूमि उसी समय महाबली एक भव्...