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Showing posts from January 5, 2025

राम चरण की गेम चेंजर ने नेल्लोर सिटी के पहले दिन के सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़े

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राम चरण की फिल्म गेम चेंजर ने नेल्लोर शहर में पहले दिन की कमाई के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, इसकी भव्य रिलीज से पहले ही प्रभावशाली अग्रिम बुकिंग हुई है। वैश्विक स्टार राम चरण की बहुप्रतीक्षित अखिल भारतीय फिल्म गेम चेंजर 10 जनवरी को अपनी भव्य रिलीज के लिए तैयार है, जिसके साथ ही तेलुगु राज्यों में संक्रांति समारोह शुरू हो गया है। अब पूरी बुकिंग शुरू हो गई है और फिल्म विभिन्न क्षेत्रों में अग्रिम टिकट बिक्री में नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है। टिकट बिक्री में उछाल और सर्वकालिक उच्च प्रत्याशा के साथ, राम चरण एक बार फिर अपने सुपरस्टारडम को साबित कर रहे हैं। प्रशंसक फिल्म के प्रीमियर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जो बस कुछ ही घंटों में रिलीज होने वाली है। दिग्गज फिल्म निर्माता शंकर द्वारा निर्देशित, गेम चेंजर एक राजनीतिक एक्शन ड्रामा है जिसमें राम चरण दोहरी भूमिका में हैं। फिल्म में कियारा आडवाणी, अंजलि, एसजे सूर्या, श्रीकांत, नवीन चंद्रा और अन्य भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। संगीत थमन द्वारा रचित है, जबकि इस परियोजना का निर्माण श्री वेंकटेश्वर क्रिएशंस और दिल राजू प्रोडक्शंस के बै...

2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था 'थोड़ी कमजोर' होने की संभावना: आईएमएफ एमडी

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि स्थिर वैश्विक वृद्धि के बावजूद 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था "थोड़ी कमजोर" रहने की उम्मीद है। जॉर्जीवा ने यह भी कहा कि उन्हें इस साल दुनिया में काफी अनिश्चितता की उम्मीद है, मुख्य रूप से अमेरिका की व्यापार नीति के इर्द-गिर्द। शुक्रवार को पत्रकारों के एक समूह के साथ अपने वार्षिक मीडिया गोलमेज सम्मेलन में उन्होंने कहा कि 2025 में वैश्विक वृद्धि स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन क्षेत्रीय विचलन के साथ। जॉर्जीवा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था थोड़ी कमजोर रहेगी। हालाँकि, उन्होंने इसके बारे में और कुछ नहीं बताया। 

भारत में एचएमपीवी के मामले.....

एचएमपीवी से लड़ने के लिए हाइड्रेशन और पोषण का सहारा लें, विशेषज्ञ कहते हैं कि एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं है। भारत में एचएमपीवी के मामलों की सूची देखें गुजरात: 3 महाराष्ट्र: 3 कर्नाटक: 2 तमिलनाडु: 2 कोलकाता: 3 कुल मामलें- 13 एचएमपीवी से लड़ने के लिए हाइड्रेशन और पोषण की जरूरत, विशेषज्ञ ने कहा एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के इलाज में एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं है, यह एक श्वसन संबंधी बीमारी है जो वर्तमान में देश में तेजी से बढ़ रही है, पूर्व एम्स निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने मंगलवार को लोगों से उचित हाइड्रेशन बनाए रखने और पौष्टिक भोजन खाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "वायरस आमतौर पर खुद को सीमित करता है, और आपको केवल लक्षणात्मक उपचार की आवश्यकता होती है। बुखार के लिए दवा लें, हाइड्रेशन बनाए रखें और अच्छा पोषण लें," उन्होंने लोगों से संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने के लिए कहा। घबराने की जरूरत नहीं; कर्नाटक सरकार कर्नाटक सरकार ने सोमवार को आश्वासन दिया कि ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) को लेकर चिं...

संगीतकार सलिल चौधरी: एक अद्वितीय संगीत प्रतिभा

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सलिल चौधरी भारतीय संगीत जगत के उन महान नामों में से एक हैं, जिनकी रचनात्मकता और दूरदृष्टि ने फिल्म संगीत को एक नई ऊंचाई दी। उन्होंने भारतीय सिनेमा में ऐसे गीत और धुनें दीं जो आज भी अमर हैं। प्रारंभिक जीवन और प्रेरणा सलिल चौधरी का जन्म 19 नवंबर 1923 को बंगाल के हरिनावी में हुआ। उनके पिता असम के चाय बागानों में डॉक्टर थे, जहां सलिल ने बचपन बिताया। इस दौरान उन्होंने असम के आदिवासी लोक संगीत को सुना और इसे अपने संगीत में शामिल किया। उनकी शिक्षा और संगीत की रुचि ने उन्हें एक बहुआयामी कलाकार बनाया। करियर की शुरुआत सलिल चौधरी IPTA (Indian People’s Theatre Association) से जुड़े और बंगाली थिएटर में संगीत और लेखन का कार्य शुरू किया। 1949 में बंगाली फिल्म "परिवर्तन" से उनका करियर शुरू हुआ। 1953 में उन्होंने हिंदी फिल्म "दो बीघा ज़मीन" से अपनी छाप छोड़ी। संगीत का जादू सलिल चौधरी का संगीत भारतीय और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का अद्भुत मिश्रण था। उनके गीतों में सामाजिक संदेश, भावनात्मक गहराई और दार्शनिकता का अनूठा मेल होता था। प्रसिद्ध हिंदी फिल्में और गीत 1. मधुमती (195...

"भारतीय सिनेमा के महान संगीतकार: रोशनलाल नागरथ (रोशन)"

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संगीतकार रोशन, जिनका पूरा नाम रोशनलाल नागरथ था, भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग के सबसे प्रतिभाशाली और लोकप्रिय संगीतकारों में से एक थे। उनका जन्म 14 जुलाई 1917 को पंजाब (अब पाकिस्तान में) के गुजरांवाला में हुआ था। रोशन को उनके मधुर और सजीव संगीत के लिए जाना जाता है, जो आज भी श्रोताओं के दिलों को छूता है। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा रोशन ने कम उम्र में ही संगीत के प्रति रुचि विकसित कर ली थी। उन्होंने संगीत की औपचारिक शिक्षा लखनऊ के मॉरिस कॉलेज ऑफ़ म्यूज़िक से ली। वहाँ उन्होंने पंडित वृषभदेव शर्मा से संगीत की तालीम हासिल की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो में काम किया, जहाँ वे शास्त्रीय संगीत में पारंगत हुए। फिल्मी करियर की शुरुआत 1948 में रोशन मुंबई आए और किदार शर्मा ने उन्हें अपनी फिल्म "नेकी और बदी" (1949) में संगीत देने का मौका दिया। हालांकि, यह फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही। लेकिन रोशन का असली ब्रेक 1950 के दशक में आया, जब उन्होंने "बावरे नैन" (1950) के लिए संगीत दिया। इस फिल्म के गीत, जैसे "तेरे बिन सूनापन" और "खयालों म...

मन्ना डे: भारतीय संगीत का अद्वितीय सितारा

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मन्ना डे, जिनका असली नाम प्रबोध चंद्र डे था, भारतीय संगीत की दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित गायकों में से एक थे। उनका जन्म 1 मई 1919 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था। मन्ना डे को भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे महान गायकों में गिना जाता है, जिन्होंने अपनी शास्त्रीय गायकी और अद्वितीय स्वर से संगीत की दुनिया को एक नई दिशा दी। उनका संगीत, गाने, और गायकी भारतीय सिनेमा और शास्त्रीय संगीत में एक अमूल्य धरोहर बन गए हैं। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा मन्ना डे का परिवार शास्त्रीय संगीत से गहरे रूप से जुड़ा हुआ था। उनके चाचा, आचार्य प्रभु दे, एक प्रसिद्ध गायक थे, और मन्ना डे ने अपनी प्रारंभिक संगीत शिक्षा उन्हीं से प्राप्त की। मन्ना डे ने कोलकाता के प्रतिष्ठित रवींद्रनाथ ठाकुर स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा ली, और बाद में शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि विकसित की। उन्होंने संगीत की शिक्षा के लिए एक बड़ा कदम तब उठाया जब वे मुंबई पहुंचे और वहाँ के प्रसिद्ध संगीतकारों और गायकों से प्रशिक्षण लिया। करियर की शुरुआत मन्ना डे का करियर फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश 1940 के दशक के अंत में हुआ। उन...

महाकुंभ 2025: शाही स्नान की तिथियां और उनका धार्मिक महत्व

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महाकुंभ भारत का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो हर 12 साल में चार स्थानों (प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, और नासिक) में से किसी एक पर आयोजित होता है। महाकुंभ 2025 विशेष है क्योंकि यह प्रयागराज में 144 वर्षों बाद अपने भव्य स्वरूप में आयोजित होगा। इस दौरान छह शाही स्नान होंगे, जो भक्तों के लिए सबसे पवित्र माने जाते हैं। आइए शाही स्नान की तिथियों और उनके धार्मिक महत्व पर चर्चा करें। महाकुंभ 2025 के शाही स्नान की तिथियां महाकुंभ 2025 में कुल 6 शाही स्नान होंगे, जो इस प्रकार हैं: शाही स्नान का महत्व 1. पौष पूर्णिमा (13 जनवरी 2025) यह महाकुंभ का पहला प्रमुख स्नान है। इस दिन से कल्पवास (नदी किनारे रहकर तपस्या) की शुरुआत होती है। 2. मकर संक्रांति (14 जनवरी 2025) मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन गंगा स्नान से मोक्ष और पवित्रता की प्राप्ति होती है। 3. मौनी अमावस्या (29 जनवरी 2025) इसे महाकुंभ का सबसे महत्वपूर्ण स्नान माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा में डुबकी लगाने से सभी पापों का नाश होता है। 4. बसंत पंचमी (3 फरवरी 2025) बसंत पंचमी ज्ञान और विद्या ...

महाकुंभ 2025: एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा

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परिचय महाकुंभ मेला, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्वितीय उत्सव, 2025 में प्रयागराज में आयोजित होने जा रहा है। यह मेला न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए आस्था, भक्ति और संस्कृति का प्रतीक है। महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदियों के संगम पर स्नान करके मोक्ष की प्राप्ति का प्रयास करते हैं। महाकुंभ का महत्व महाकुंभ हर 12 साल में एक बार आयोजित होता है। यह भारतीय ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान संगम में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और आत्मा को शुद्धता मिलती है। यह उत्सव केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। 2025 महाकुंभ की खासियतें महाकुंभ 2025 के आयोजन के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। 1. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुल, सड़कें और घाटों का निर्माण हो रहा है। 2. डिजिटल सेवाएं: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, भीड़ प्रबंधन और लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की जा रही है। 3. सुरक्षा उपाय: लाखों लोग...

"ओएनडीसी: ई-कॉमर्स में क्रांति लाने वाली भारत सरकार की नई पहल"

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ओएनडीसी (ONDC) का पूरा नाम "ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स" है। यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य डिजिटल कॉमर्स में एक ओपन और समावेशी नेटवर्क बनाना है। इसे डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के तहत विकसित किया गया है। उद्देश्य: 1. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को लोकतांत्रिक बनाना: यह अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर निर्भरता को कम करने के लिए छोटे और मध्यम व्यापारियों को एक समान मंच प्रदान करता है। 2. विक्रेताओं और खरीदारों को जोड़ना: ओएनडीसी का लक्ष्य यह है कि विक्रेता और खरीदार एक साझा नेटवर्क पर स्वतंत्र रूप से व्यापार कर सकें, चाहे वे किसी भी प्लेटफॉर्म पर हों। 3. व्यापार में निष्पक्षता: छोटे और स्थानीय व्यापारियों को बड़े प्लेटफॉर्म की प्रतिस्पर्धा में मदद करना। 4. सस्ते और बेहतर विकल्प: ग्राहकों को किफायती दामों पर अधिक विकल्प उपलब्ध कराना। ओएनडीसी कैसे काम करता है? यह एक ओपन-सोर्स नेटवर्क है, जिसमें कोई भी विक्रेता या सेवा प्रदाता शामिल हो सकता है। ग्राहक अपनी पसंदीदा एप्लिकेशन का उपयोग करके ओएनडीसी प्लेट...

डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य: सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी के प्रभाव

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आज के डिजिटल युग में, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। जहां एक ओर यह हमें सूचना और संवाद के नए तरीके प्रदान करता है, वहीं दूसरी ओर यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। आइए, जानते हैं कि सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर हो सकता है। 1. सोशल मीडिया का प्रभाव सोशल मीडिया जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर ने लोगों को आपस में जोड़ने का एक नया तरीका प्रदान किया है। लेकिन इसकी अत्यधिक उपयोगिता से कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। सोशल मीडिया पर ‘फOMO’ (Fear of Missing Out) और 'कॉम्पेरेटिव' मानसिकता बढ़ सकती है, जिससे व्यक्ति अपनी वास्तविकता से दूर हो सकता है और आत्म-सम्मान में कमी महसूस कर सकता है। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर अनचाही तुलना और नकारात्मक टिप्पणियों का असर आत्मविश्वास पर पड़ सकता है। व्यक्ति अपने जीवन को दूसरों से तुलना करता है, जिससे डिप्रेशन और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 2. ऑनलाइन बूलिंग और मानसिक दबाव इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर ऑनलाइन ब...