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Showing posts from January 12, 2025

जितना गहरा मोह होगा, उतना ही अधिक दर्द होगा

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मोह एक ऐसी भावना है, जो हमें किसी चीज़, व्यक्ति, या स्थिति से जोड़ देती है। लेकिन जब यह मोह गहरा होता है, तो इसके टूटने या असंतुलित होने पर दर्द भी उतना ही अधिक होता है। इस ब्लॉग में हम मोह, उसके प्रभाव और इससे उत्पन्न होने वाले दर्द के मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं को समझेंगे। --- मोह और उसके परिणाम मोह का अर्थ है किसी चीज़ के प्रति अत्यधिक आसक्ति। यह संबंध परिवार, दोस्तों, प्रेमी-प्रेमिका या भौतिक वस्तुओं से हो सकता है। मोह के मुख्य कारण: 1. संबंधों की गहराई: जब आप किसी व्यक्ति या चीज़ से गहराई से जुड़े होते हैं। 2. अपेक्षाएं: मोह अक्सर हमारी उम्मीदों पर आधारित होता है। 3. स्वयं का अधूरापन: हम अक्सर मोह का सहारा अपनी आंतरिक रिक्तता को भरने के लिए लेते हैं। परिणाम: जब हमारी अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तो दुख उत्पन्न होता है। यह मानसिक तनाव, चिंता और आत्मसम्मान की कमी का कारण बन सकता है। --- मोह और दर्द के बीच का संबंध “जितना गहरा मोह होगा, उतना ही अधिक दर्द होगा” का सीधा अर्थ है कि हमारी खुशी और दुख का आधार मोह के गहराई पर निर्भर करता है। 1. भावनात्मक दर्द: जब आपकी...

समय के साथ दर्द कम नहीं होते, बस आदत हो जाती है दर्द सहने की

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जीवन की इस भागदौड़ में हम सभी ने कभी न कभी भावनात्मक या शारीरिक दर्द का अनुभव किया है। अक्सर लोग कहते हैं कि "समय हर घाव भर देता है," लेकिन सच्चाई यह है कि दर्द समय के साथ कम नहीं होता, बल्कि हम उसे सहने की आदत डाल लेते हैं। यह ब्लॉग इसी विचार को गहराई से समझाने और उन उपायों पर चर्चा करेगा जो हमें इस दर्द से निपटने में मदद कर सकते हैं। दर्द को समझना: क्यों यह कम नहीं होता? दर्द, चाहे वह शारीरिक हो या भावनात्मक, हमारे मस्तिष्क में गहरी छाप छोड़ता है। जब हम किसी नुकसान, विफलता, या व्यक्तिगत क्षति का सामना करते हैं, तो उसका प्रभाव हमारे दिल और दिमाग पर लंबे समय तक बना रहता है। मुख्य कारण: 1. भावनात्मक जुड़ाव: जब किसी व्यक्ति या चीज़ से हमारा गहरा जुड़ाव होता है, तो उसे खोने का दर्द जल्दी खत्म नहीं होता। 2. दिमागी संरचना: मस्तिष्क में मौजूद न्यूरल नेटवर्क दर्द के अनुभव को बार-बार दोहराता है। 3. सामाजिक दबाव: समाज अक्सर हमें दर्द व्यक्त न करने की सलाह देता है, जिससे हम इसे अंदर ही अंदर सहते रहते हैं। समय के साथ दर्द सहने की आदत कैसे विकसित होती है? जब हम दर्द का सामना ...

संघर्ष में तुम अनाथ हो मित्र, काफिला तो सफलता के बाद उमड़ता है

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प्रस्तावना जीवन का संघर्ष हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। यह एक ऐसा दौर है, जब इंसान अकेला महसूस करता है। संघर्ष के समय बहुत कम लोग साथ खड़े होते हैं, लेकिन जैसे ही सफलता का स्वाद चखते हैं, चारों ओर भीड़ उमड़ आती है। यह ब्लॉग उन्हीं संघर्षशील लोगों को समर्पित है, जो अपनी मेहनत से सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने का सपना देखते हैं। --- संघर्ष का असली चेहरा जब आप कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं, तब साथ देने वाले लोग बहुत कम होते हैं। यह दौर न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी कठिन होता है। चुनौतियों का सामना करना: संघर्ष में हर कदम मुश्किल होता है। लोग आपको हतोत्साहित करने की कोशिश करेंगे। अकेलापन: संघर्ष में अक्सर इंसान को लगता है कि वह अकेला है। यह समय आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की परीक्षा लेता है। सफलता के बाद बदलता माहौल सफलता के बाद चीजें पूरी तरह बदल जाती हैं। जिन लोगों ने आपके संघर्ष के समय आपका साथ नहीं दिया, वे अचानक से आपके प्रशंसक बन जाते हैं। काफिले का उमड़ना: सफलता के बाद लोग आपके आसपास जमा होने लगते हैं। यह आपकी मेहनत और धैर्य का परिणाम होता ह...

ज़रूरी नहीं कोई बात ही चुभे, बात ना होना भी बहुत चुभता है

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इंसानी रिश्ते और भावनाएं बेहद जटिल होती हैं। हमारे शब्द कभी किसी के दिल को सुकून पहुंचा सकते हैं तो कभी गहरे घाव भी दे सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि खामोशी भी उतनी ही ताकतवर होती है? कभी-कभी किसी अपने की चुप्पी हमारे दिल को गहरी चोट दे जाती है। ख़ामोशी का असर रिश्तों पर रिश्तों में संवाद (communication) का होना बेहद ज़रूरी है। जब कोई अपने बिना वजह चुप हो जाए या बातचीत से बचने लगे, तो यह दूसरी तरफ के व्यक्ति को emotional pain का एहसास दिला सकता है। ख़ामोशी से रिश्ते कमजोर हो सकते हैं। संवादहीनता से गलतफहमियां बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक बात ना होने से मानसिक तनाव (mental stress) बढ़ सकता है। बात ना होना क्यों चुभता है? 1. संवेदनाओं का दम घुटना जब लोग एक-दूसरे से बात नहीं करते, तो उनके अंदर की भावनाएं (emotions) दब जाती हैं। यह mental health के लिए नुकसानदायक हो सकता है। 2. अपनापन खत्म होना रिश्तों की मजबूती का आधार है संवाद। जब संवाद खत्म होता है, तो belongingness का एहसास भी कमजोर पड़ने लगता है। 3. अनकहे शब्दों का बोझ जो बातें कही नहीं जातीं, वे अक्सर एक बोझ बन जात...

शरीर की सभी नसों को खोलनें का आयुर्वेदिक समाधान....

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कपूर और नींबु कितने उपयोगी है...दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर के बाल से पैर की उंगली तक सारी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं, ◾पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।  ◾इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है.  ◾यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें ◾फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर हो। कपूर की तीन गोलिय् बारीक पीस...

बाबा गोरखनाथ कैसे प्रकट हुए कहानी भारतीय संतों की सिद्धियों को दिखाती है। बहुत समय पहले की बात है।2 मिनट समय निकालकर Thread अंत तक अवश्य पढ़े.... 🧵👇

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बाबा मत्स्येंद्र नाथ भ्रमण पर निकलें थें। उन्हें बाबा मछिंद्रनाथ नाथ के भी नाम से जाना जाता है। पूर्व काल के बड़े ही प्रसिद्ध एवं दिव्य योगी हैं। बाबा ने वहां खड़े होकर गृहस्तों को भोजन हेतु स्वर लगाए। तभी अंदर से एक महिला निकल कर बाहर आई बाबा को देखते ही उन्हें प्रणाम किया और भोजन लाने अंदर चली गई। पुत्र का वरदान  जब महिला भोजन लेकर आई तब उसके मुख पर प्रसन्नता नहीं थी। उसने आकर बाबा के पात्र में भोजन रख दिया। उसके मुख की उदासी देखकर बाबा समझ तो गए थे कि उसके दुखों का कारण क्या है? परंतु, वह उस महिला से उसकी इच्छा जानना चाहते थे। बाबा मत्सेन्द्र नाथ ने उस महिला से उसकी उदासी का कारण पूछा। महिला ने अश्रुपूरित आंखों के साथ बाबा से कहा, “बाबा! मैं निःसंतान हूं। बाबा ने विभूति देते हुए उस महिला से कहा, “देवी यह विभूति खा लेना। निःसंदेह आपके घर पुत्र पैदा होगा। यह बोलकर बाबा वहां से चले गए। महिला ने अवसर चूका अब महिला विचार में पड़ गई कि उसे यह विभूति खानी चाहिए या नहीं खानी चाहिए। एक तो लोक लाज की बात भी थी। दूसरा, आसपास की महिलाओं ने भी उस महिला को विभूति नहीं खाने की सलाह...

"हालात बदलनें थें, हालातों नें बदल दिया: जीवन में बदलाव और उससे निपटने के उपाय"

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परिचय हमारे जीवन में कभी न कभी ऐसे पल आते हैं जब हमें लगता है कि कुछ बदलने की जरूरत है। "हालात बदलने थे, हालातों ने बदल दिया" यह पंक्ति हमारे जीवन के उस बदलाव को दर्शाती है, जो हम चाहते हैं, लेकिन वह अप्रत्याशित तरीके से आता है। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि हालातों का बदलाव किस तरह से हमारे जीवन को प्रभावित करता है और हम इसे कैसे अपनाकर अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं। 1. जीवन में बदलाव के कारण हमारे जीवन में कई बार ऐसे हालात आते हैं, जब हम सोचते हैं कि हमें कुछ करना चाहिए, लेकिन वास्तविकता में बदलाव खुद ब खुद आता है। कई बार परिस्थितियाँ हमें ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर करती हैं जो हम पहले नहीं सोचते थे। यह बदलाव कई कारणों से हो सकता है, जैसे: आर्थिक स्थिति में बदलाव व्यक्तिगत रिश्तों में उतार-चढ़ाव स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ नई नौकरी या शिक्षा के अवसर 2. बदलाव का सामना कैसे करें? हमारे जीवन में आए बदलावों का सामना करने के लिए हमें मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए। बदलाव से घबराने के बजाय, हमें उसे समझने और अपनाने की आवश्यकता है। यहां कुछ उपाय दिए गए हैं, जिन्हें अपना...

दिल में संतुष्टि रखो, लोग तो महलों में भी रो रहे हैं! - एक गहरी सीख

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी किसी न किसी चीज़ के लिए दौड़ रहे हैं, जैसे- पैसे, सफलता, रिश्ते, या कुछ और। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीज़ हम इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं, वही हमें सुकून और संतुष्टि देगी? अक्सर हम सोचते हैं कि महल या बहुत बड़ी संपत्ति हासिल करने से हमारी जिंदगी पूरी हो जाएगी, लेकिन सच्चाई यह है कि संतुष्टि अंदर से आती है, न कि बाहरी चीज़ों से। इस ब्लॉग में, हम यह समझेंगे कि दिल में संतुष्टि कैसे रखें और क्यों महलों में रहने वाले लोग भी रो रहे हैं। 1. संतुष्टि क्या है? संतुष्टि का मतलब है आत्म-प्राप्ति और अपने वर्तमान में खुश रहना। यह बाहरी परिस्थितियों से परे है और व्यक्ति की आंतरिक स्थिति को दर्शाती है। जो लोग अपने अंदर शांति और संतोष पा लेते हैं, वे कभी भी बाहर की वस्तुओं के पीछे नहीं भागते। 2. संपत्ति और सफलता की खोज हमारी समाज में, अक्सर यह मान लिया जाता है कि धन और सफलता से ही खुशी मिलती है। लेकिन कई बार महलों में रहने वाले लोग भी मानसिक शांति से वंचित होते हैं। वे अपनी सफलता के बावजूद संतुष्ट नहीं हो पाते। इसका कारण यह है कि बाहरी वस्...

संघर्ष ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है: जीवन की सच्चाई

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जब भी हम जीवन के संघर्षों के बारे में सोचते हैं, तो हमें लगता है कि ये चुनौतियाँ हमारी ज़िंदगी को कठिन बना देती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही संघर्ष हमें सशक्त और श्रेष्ठ बनाने में मदद करता है? यह ब्लॉग हमें यही समझाने का प्रयास करेगा कि जीवन के संघर्ष से कैसे हम अपने अंदर छिपी शक्तियों को पहचान सकते हैं और कैसे ये हमें सफलता के मार्ग पर अग्रसर करते हैं। संघर्ष का असल मतलब संघर्ष का मतलब सिर्फ कठिनाई नहीं है। यह हमारे जीवन में एक शक्ति के रूप में सामने आता है जो हमें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है। हर बार जब हम किसी समस्या से जूझते हैं, हम कुछ नया सीखते हैं और इससे हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता है। संघर्ष से सफलता की ओर सभी महान लोग जिन्होंने इतिहास में अपने नाम दर्ज किए, उन्होंने भी कठिन संघर्षों का सामना किया। चाहे वह महात्मा गांधी हों, एलबर्ट आइंस्टीन या फिर भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज, सबने अपने जीवन में असफलताओं और संघर्षों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इन संघर्षों ने उन्हें उनके लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रेरित किया। कैसे संघर्ष...

महाभारत काल और भारतीय संस्कृति का विदेशों से संपर्क: एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण

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Introduction: महाभारत काल (Mahabharata era) को भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह समय न केवल युद्धों और धर्म के संघर्ष का था, बल्कि यह भी एक ऐसा काल था जब भारतीय सभ्यता (Indian civilization) का संपर्क अन्य प्राचीन सभ्यताओं से हुआ था। इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि कैसे महाभारत काल में भारत की संस्कृति और विश्व के अन्य हिस्सों के बीच संबंध थे। --- महाभारत काल में भारतीय संस्कृति का वैश्विक संपर्क महाभारत के समय भारतीय सभ्यता का अन्य देशों से सीधा संपर्क था। महाभारत के युद्धों और पौराणिक घटनाओं के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि उस समय भारत का प्रभाव केवल एशिया तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसे यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका जैसे दूरदराज क्षेत्रों में भी माना जाता था। भारतीय संस्कृति और शिक्षा का प्रभाव उन स्थानों पर था, जो आज की दुनिया में अदृश्य प्रतीत होते हैं। --- भारतीय सभ्यता और अमेरिका का प्राचीन संपर्क भारत और अमेरिका के बीच प्राचीन संबंधों को लेकर कई ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं। भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Indian astrology) और वेदों में अमेरिका का उल्लेख किया गया है...

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग: भविष्य की दिशा

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) ने तकनीकी दुनिया में क्रांति ला दी है। ये तकनीकें न केवल हमारे दैनिक जीवन को सरल बना रही हैं, बल्कि उद्योगों में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला रही हैं। AI और ML क्या हैं? AI एक ऐसी प्रणाली है जो मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करती है, जबकि ML इसके उपसमुच्चय के रूप में मशीनों को डेटा के आधार पर सीखने और निर्णय लेने में सक्षम बनाता है। वर्तमान में AI और ML का उपयोग स्वास्थ्य सेवा: रोग निदान, उपचार योजना और मरीजों की निगरानी में सहायता। वित्त: धोखाधड़ी का पता लगाने, जोखिम प्रबंधन और स्वचालित ट्रेडिंग में उपयोग। शिक्षा: व्यक्तिगत शिक्षण अनुभव और प्रशासनिक कार्यों का स्वचालन। ग्राहक सेवा: चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट के माध्यम से त्वरित सहायता। भविष्य की संभावनाएं AI और ML के विकास के साथ, हम स्वचालित वाहनों, स्मार्ट शहरों और उन्नत रोबोटिक्स की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि, इसके साथ नैतिक और सामाजिक चुनौतियां भी उत्पन्न होती हैं, जिन्हें संबोधित करना आवश्यक है। निष्कर्ष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग हमारे भविष्य को आकार दे रहे ...

"तनाव से निपटने के 10 आसान और प्रभावी उपाय: मानसिक शांति के लिए टिप्स"

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Introduction: आजकल की तेज़-रफ़्तार ज़िन्दगी में तनाव (stress) एक सामान्य समस्या बन गई है। चाहे काम का दबाव हो या निजी जीवन की समस्याएं, हर किसी को कभी न कभी तनाव का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तनाव को आसानी से कम किया जा सकता है? इस ब्लॉग में हम आपको तनाव (stress) को दूर करने के लिए 10 प्रभावी उपाय बताएंगे। आइए जानते हैं कि तनाव को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है और मानसिक शांति (mental peace) प्राप्त की जा सकती है। 1. नियमित रूप से ध्यान (Meditation) करें: ध्यान मानसिक शांति पाने का एक पुराना और प्रभावी तरीका है। नियमित रूप से ध्यान करने से आपका दिमाग शांत रहता है और तनाव (stress) कम होता है। मानसिक शांति के लिए हर दिन 10-15 मिनट का ध्यान करें। इससे आपकी सोच में स्पष्टता आएगी और आप बेहतर महसूस करेंगे। 2. शारीरिक गतिविधि (Physical Activity) में शामिल हों: व्यायाम तनाव (stress) को कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। शारीरिक गतिविधियाँ जैसे दौड़ना, योग या वॉक करना शरीर में एंडोर्फिन (endorphins) नामक हार्मोन का स्त्राव करते हैं, जो आपको खुशी और संतुष्टि का अन...

फ्रांस के गणित प्रोफेसर फेड्रिक ब्रूनो ने अपनाया सनातन धर्म, महाकुंभ में बनेंगे 'ब्रूनो गिरी'

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फ्रांस की प्रसिद्ध सारबोर्न यूनिवर्सिटी के गणित प्रोफेसर फेड्रिक ब्रूनो ने अपनी नौकरी छोड़कर सनातन धर्म अपनाने का फैसला किया है। प्रोफेसर ब्रूनो का सनातन धर्म की ओर रुझान फेड्रिक ब्रूनो, जिन्होंने वर्षों तक गणित के कठिन सिद्धांतों और अंकों के गुणा-भाग में अपनी जिंदगी बिताई, अब अध्यात्म की शांति और संतोष की तलाश में हैं। उनका कहना है, "मैंने अंकों का खेल बहुत देख लिया, लेकिन अब मेरा मन सच्चे सुख और शांति की ओर खिंच रहा है।" महाकुंभ में लेंगे जूना अखाड़े की दीक्षा महाकुंभ 2025 के दौरान फेड्रिक ब्रूनो जूना अखाड़े के सन्यासी बनने जा रहे हैं। जूना अखाड़े के महंत घनानंद गिरी जी को उन्होंने अपना आध्यात्मिक गुरु स्वीकार किया है। दीक्षा के बाद वे 'ब्रूनो गिरी' के नाम से जाने जाएंगे। परिवार के साथ सनातन धर्म की ओर कदम फ्रांस के इस गणितज्ञ का यह कदम न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि उनके परिवार ने भी इसे अपनाने में सहमति दी है। पत्नी और तीन बच्चों के साथ गृहस्थ जीवन जीने वाले प्रोफेसर ब्रूनो का कहना है, "यह सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि मेरे परिवार का भी जीवन बदलने वाला निर्ण...

शिव तांडव: सृष्टि, संहार और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक

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शिव तांडव केवल एक नृत्य नहीं है, बल्कि यह सृष्टि, संहार और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। भगवान शिव का यह दिव्य नृत्य जीवन, प्रकृति के अनंत चक्र और आत्मज्ञान का गूढ़ संदेश देता है। आइए, शिव तांडव की महिमा, उसके रहस्यों और जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाले संदेशों को समझें। --- 1. शिव तांडव का स्वरूप और महत्व शिव तांडव भगवान शिव का रौद्र और सृजनात्मक नृत्य है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा और जीवन के चक्र (Cycle of Life) को दर्शाता है। यह नृत्य दो स्वरूपों में प्रकट होता है: लास्य तांडव: सौम्यता, सृजन और प्रसन्नता का प्रतीक। रौद्र तांडव: संहार, परिवर्तन और पुनः निर्माण का प्रतीक। इस नृत्य का मूल संदेश है कि सृजन और संहार जीवन के अभिन्न भाग हैं। यह हमें सिखाता है कि हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत है। --- 2. शिव तांडव और सृष्टि का चक्र शिव का तांडव ब्रह्मांड के सतत परिवर्तन का प्रतीक है। इसमें तीन मुख्य पहलू छिपे हैं: सृष्टि (Creation) संरक्षण (Preservation) संहार (Destruction) यह नृत्य हमें जीवन और मृत्यु, आरंभ और अंत, और पुनः सृजन की प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने की शिक्षा देता है।...

"मंगोलिया: घोड़ों की धरती और उनकी अनोखी संस्कृति"

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मंगोलिया की आबादी 35,00,000 है लेकिन घोड़ों की आबादी 50,00,000 है. इंसानी आबादी से अधिक घोड़ों की संख्या है. मंगोलिया में घोड़े मंगोलियाई संस्कृति का हिस्सा हैं.  घोड़े शक्ति, स्वतंत्रता और पशु धन का प्रतीक हैं. जैसे भारत के लोग भैंस और गाय का दूध पीते हैं, उसी तरह मंगोलिया के लोग घोड़े का दूध पीते हैं और घोड़े का मांस उनके भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा है. 13वीं सदी में मंगोल साम्राज्य के विजयी अभियान में घोड़ों ने अहम भूमिका निभाई. चंगेज खान की सेना अपने साथ बहुत कम रसद लेकर चलते थें. मंगोल सेना को प्यास लगती तो घोड़ी का दूध पीते या नस कटकर खून पीते. भूख लगती तो घोड़ा बिरयानी खाकर भूख मिटाते. घोड़ों के दम पर मंगोल साम्राज्य ने दुनिया के 23 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर भूमि को जीता. मंगोलिया में घोड़ों का महत्व: 1. संस्कृति और जीवनशैली: घोड़े मंगोलियाई लोगों के लिए केवल एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। मंगोलियाई खानाबदोश घोड़ों का उपयोग आवागमन, कृषि, और पशुधन को संभालने में करते हैं। 2. भोजन संस्कृति: मंगोलियाई लोग घोड़ी का दूध (जिसे 'ऐर...

ऋषि, मुनि, साधु और संन्यासी में अंतर..??

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भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनियों का बहुत महत्त्व रहा है। ऋषि मुनि समाज के पथ प्रदर्शक माने जाते थे और वे अपने ज्ञान और साधना से हमेशा ही लोगों और समाज का कल्याण करते आए हैं। ऋषि कौन होते हैं - भारत हमेशा से ही ऋषियों का देश रहा है। हमारे समाज में ऋषि परंपरा का विशेष महत्त्व रहा है। आज भी हमारे समाज और परिवार किसी न किसी ऋषि के वंशज माने जाते हैं।ऋषि वैदिक परंपरा से लिया गया शब्द है जिसे श्रुति ग्रंथों को दर्शन करने वाले लोगों के लिए प्रयोग किया गया है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है वैसे व्यक्ति जो अपने विशिष्ट और विलक्षण एकाग्रता के बल पर वैदिक परंपरा का अध्ययन किये और विलक्षण शब्दों के दर्शन किये और उनके गूढ़ अर्थों को जाना और प्राणी मात्र के कल्याण हेतु उस ज्ञान को लिखकर प्रकट किये ऋषि कहलाये। ऋषियों के लिए इसी लिए कहा गया है "ऋषि: तु मन्त्र द्रष्टारा : न तु कर्तार : अर्थात ऋषि मंत्र को देखने वाले हैं न कि उस मन्त्र की रचना करने वाले। हालाँकि कुछ स्थानों पर ऋषियों को वैदिक ऋचाओं की रचना करने वाले के रूप में भी व्यक्त किया गया है। ऋषि शब्द का अर्थ - ऋषि शब्द ...

भगवान परशुराम के जीवन से संबंधित 13 रोचक तथ्य

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हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु के आवेशावतार परशुराम का जन्म हुआ था।  1. अपने शिष्य भीष्म के साथ युद्ध महाभारत के अनुसार महाराज शांतनु के पुत्र भीष्म ने भगवान परशुराम से ही अस्त्र-शस्त्र की विद्या प्राप्त की थी। एक बार भीष्म काशी में हो रहे स्वयंवर से काशीराज की पुत्रियों अंबा, अंबिका और बालिका को अपने छोटे भाई विचित्रवीर्य के लिए उठा लाए थे। तब अंबा ने भीष्म को बताया कि वह मन ही मन किसी और का अपना पति मान चुकी है तब भीष्म ने उसे ससम्मान छोड़ दिया, लेकिन हरण कर लिए जाने पर उसने अंबा को अस्वीकार कर दिया। तब अंबा भीष्म के गुरु परशुराम के पास पहुंची और उन्हें अपनी व्यथा सुनाई। अंबा की बात सुनकर भगवान परशुराम ने भीष्म को उससे विवाह करने के लिए कहा, लेकिन ब्रह्मचारी होने के कारण भीष्म ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। तब परशुराम और भीष्म में भीषण युद्ध हुआ और अंत में अपने पितरों की बात मानकर भगवान परशुराम ने अपने अस्त्र रख दिए। इस प्रकार इस युद्ध में न किसी की हार हुई न किसी की ...

बिना पैसे खर्च किए घर के समस्त वास्तुदोष दूर करने के उपाय

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में वास्तुदोष तथा वास्तु संबंधी नियमों का विशेष महत्व होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में यदि वास्तु संबंधी कोई भी दोष होता है तो इसका नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर जरूर पड़ता है, उस घर में सुख और शांति का हमेशा अभाव बना रहता है।  🧵घर के वास्तुदोष को दूर करने के उपाय👇 🔹 वास्तु शास्त्र में स्वास्तिक का विशेष महत्व है। घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वास्तु दोष कम होता है तथा मंगल ग्रह के दोष भी समाप्त होते हैं। 🔹वास्तु शास्त्र के अनुसार घर को साफ सुथरा और रोशनी से भरपूर होना बहुत आवश्यक है, यदि घर में पॉजिटिव एनर्जी चाहते हैं तो घर के वायव्य कोण पर दीपक जलाकर रखें। 🔹 वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर में वास्तु दोष है तो घर के ईशान कोण में कलश रखना सबसे उचित माना जाता है। ध्यान रखें कि कलश कहीं से भी टूटा हुआ नहीं होना चाहिए। हिंदू मान्यताओं के अनुसार कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना जाता है। गणेश जी को सुख देने वाला और विघ्नों का नाश करने वाला माना जाता है। घर में ...

Vivo Y300 Plus 5G: एक बेहतरीन स्मार्टफोन का नया अध्याय

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वीवो ने हाल ही में भारतीय बाजार में अपने नए स्मार्टफोन, Vivo Y300 Plus 5G को लॉन्च किया है। यह स्मार्टफोन एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है उन यूजर्स के लिए जो एक बजट-फ्रेंडली, फास्ट 5G स्मार्टफोन की तलाश में हैं। चलिए, इस स्मार्टफोन के बारे में विस्तार से जानते हैं। Vivo Y300 Plus 5G के प्रमुख फीचर्स: 1. 32 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा: Vivo Y300 Plus में 32 मेगापिक्सल का हाई-रिजोल्यूशन सेल्फी कैमरा है। यह कैमरा शानदार फोटो और वीडियो क्वालिटी देने में सक्षम है, जो सोशल मीडिया पर अपनी खूबसूरती को बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। 2. 50 मेगापिक्सल + 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा: स्मार्टफोन का रियर कैमरा सेटअप भी कमाल का है, जिसमें 50 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा और 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर है। ये दोनों कैमरे मिलकर बेहतरीन फोटो क्लिक करने में मदद करते हैं, चाहे दिन हो या रात। 3. 5000mAh की बैटरी: Vivo Y300 Plus में 5000mAh की बैटरी दी गई है, जो पूरे दिन की बैटरी लाइफ सुनिश्चित करती है। लंबी बैटरी लाइफ...