"मंगोलिया: घोड़ों की धरती और उनकी अनोखी संस्कृति"
इंसानी आबादी से अधिक घोड़ों की संख्या है. मंगोलिया में घोड़े मंगोलियाई संस्कृति का हिस्सा हैं.
घोड़े शक्ति, स्वतंत्रता और पशु धन का प्रतीक हैं. जैसे भारत के लोग भैंस और गाय का दूध पीते हैं, उसी तरह मंगोलिया के लोग घोड़े का दूध पीते हैं और घोड़े का मांस उनके भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा है.
13वीं सदी में मंगोल साम्राज्य के विजयी अभियान में घोड़ों ने अहम भूमिका निभाई. चंगेज खान की सेना अपने साथ बहुत कम रसद लेकर चलते थें.
मंगोल सेना को प्यास लगती तो घोड़ी का दूध पीते या नस कटकर खून पीते. भूख लगती तो घोड़ा बिरयानी खाकर भूख मिटाते.
घोड़ों के दम पर मंगोल साम्राज्य ने दुनिया के 23 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर भूमि को जीता.
मंगोलिया में घोड़ों का महत्व:
1. संस्कृति और जीवनशैली: घोड़े मंगोलियाई लोगों के लिए केवल एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। मंगोलियाई खानाबदोश घोड़ों का उपयोग आवागमन, कृषि, और पशुधन को संभालने में करते हैं।
2. भोजन संस्कृति: मंगोलियाई लोग घोड़ी का दूध (जिसे 'ऐरग' कहा जाता है) पीते हैं, जो उनके लिए पोषण का मुख्य स्रोत है। इसके अलावा, घोड़े का मांस उनके पारंपरिक भोजन में शामिल है।
3. इतिहास: 13वीं सदी में चंगेज खान और उनकी सेना की सफलता का श्रेय घोड़ों को दिया जाता है। ये घोड़े न केवल युद्ध के लिए सहायक थे, बल्कि सेना के लिए भोजन और पानी की कमी को भी पूरा करते थे।
4. प्रतीकात्मक महत्व: मंगोलियाई संस्कृति में घोड़े शक्ति, स्वतंत्रता और संपन्नता का प्रतीक हैं।
घोड़ों का ऐतिहासिक योगदान:
चंगेज खान की सेना घोड़ों के बल पर दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य बनाने में सफल रही। ये सेना घोड़ों पर निर्भर थी, जो न केवल तेज गति से यात्रा करने में मदद करते थे, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में भोजन और ऊर्जा का स्रोत भी बनते थे।
रोचक तथ्य:
मंगोलियाई सेना एक व्यक्ति के साथ 3-4 घोड़े रखते थे, ताकि हर समय घोड़े ताजगी से यात्रा कर सकें।
आज भी मंगोलिया में हर व्यक्ति के पास औसतन 1.5 से 2 घोड़े हैं।
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