अनंत चतुर्दशी व्रत – अनंत सुख और समृद्धि का पर्व
अनंत चतुर्दशी व्रत भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि महाभारत काल में जब धर्मराज युधिष्ठिर कठिन परिस्थितियों से घिरे, तब भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन पर उन्होंने यह व्रत रखा। तभी से यह परंपरा शुरू हुई। --- पूजा विधि प्रातःकाल स्नान कर संकल्प लें। पूजन स्थल को स्वच्छ कर चौक पूरें और कलश स्थापित करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र पर गंगाजल, पुष्प, अक्षत, फल, मिठाई और पंचामृत अर्पित करें। चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र (कच्चा धागा/रेशमी डोरी) भगवान को अर्पित करें और बाद में इसे दाहिने हाथ में बांधें। व्रत के दौरान अनंत चतुर्दशी कथा का श्रवण अनिवार्य है। --- अनंत भगवान का मंत्र 👉 “ॐ अनन्ताय नमः” 👉 “ॐ अनन्ताय जगन्नाथाय अक्लिष्टाय नमो नमः” इन मंत्रों का 108 बार जप करने से जीवन के समस्त कष्ट मिटते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। --- व्रत का महत्व घर-परिवार में शांति और समृद्धि आती है। रोग, बाधाएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। संतान सुख, वैवाहिक जीवन और व्यापार में उन्नति होती है। इस...