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Showing posts from September 7, 2025

बंगाल का औद्योगिक पतन : एक गौरवशाली इतिहास से बेरोजगारी तक का सफर

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--- बंगाल का गौरवशाली अतीत भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर औद्योगिक क्रांति तक, बंगाल हमेशा अग्रणी रहा। कोलकाता (कलकत्ता) का जूट उद्योग पूरे विश्व में मशहूर था। लाखों लोगों को रोजगार देने वाले इस उद्योग का अब नामोनिशान मिट चुका है। उद्योगों का पतन और पलायन 👉 साइकिल इंडस्ट्री – बंगाल से लुधियाना (पंजाब) शिफ्ट। 👉 केमिकल प्लांट्स – कोलकाता से रायपुर (छत्तीसगढ़) चले गए। 👉 बैटरी इंडस्ट्री – मालदा और आसपास से महाराष्ट्र व गुजरात। 👉 ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री – हिंदुस्तान मोटर्स और अन्य कंपनियाँ बंद। 👉 सीमेंट इंडस्ट्री – आज बंगाल में एक भी फैक्ट्री नहीं बची। उद्योगपतियों का पलायन मारवाड़ी बिजनेसमैन जैसे खेतान, मुरारका, झुनझुनवाला, सेकसरिया, कुण्डलिया, गोयनका, नियोटिया, बिरला, बजाज आदि बंगाल छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान चले गए। सिंगूर विवाद और टाटा मोटर्स रतन टाटा की नैनो फैक्ट्री को ममता बनर्जी के विरोध का सामना करना पड़ा। टाटा मोटर्स ने बंगाल छोड़कर गुजरात के सानंद में अपनी फैक्ट्री स्थापित की। आज सानंद ऑटोमोबाइल और EV का वैश्विक हब बन चुका है। आज का बंगाल : बेरोजगारी औ...

भगवान विष्णु के चरणों का महत्व – चरणारविन्द की अद्भुत महिमा

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परिचय सनातन धर्म में भगवान विष्णु के चरणों को अत्यंत पूजनीय माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान के पावों में ही स्वर्ग का वास है। भक्तजन अपने जीवन को सफल बनाने के लिए प्रभु के चरणारविन्दों की शरण में जाते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि भगवान विष्णु के चरणों का इतना महत्व क्यों है? आइए जानते हैं। --- चरणरज (चरणों की धूल) की महिमा भगवान विष्णु के चरणों की धूल पापों का नाश करती है। यह ऐसी दिव्य सुगंध बिखेरती है कि चंदन, अगरु और अन्य सुगंध भी इसके आगे फीकी पड़ जाती हैं। भक्त के हृदय में प्रभु के चरण बस जाने पर उसकी कीर्ति स्वतः फैलने लगती है। --- भगवान विष्णु के चरणों में अंकित दिव्य चिह्न 1. शंख का चिह्न शंख विजय का प्रतीक है। जिस भक्त के हृदय में भगवान के चरण बसते हैं, वह जीवन में हर प्रकार से विजयी होता है। 2. ऊर्ध्वरेखा का चिह्न यह निरंतर ऊँचाइयों की ओर बढ़ने का संकेत है। भगवान के चरणों का ध्यान करने वाला भक्त सदैव अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। 3. राजा बलि का चिह्न यह चिह्न समर्पण और अहंकार-विनाश का प्रतीक है। भगवान ने वामन रूप में राजा बलि के मस्तक पर अपने चर...

Sovereign Gold Bonds 2020-21 Series VI: RBI ने घोषित की Early Redemption, निवेशकों को 108% तक लाभ

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Reserve Bank of India (RBI) ने Sovereign Gold Bonds (SGBs) 2020-21 Series VI की पूर्व समय पर रिडेम्प्शन (Early Redemption) की अनुमति दे दी है। यह बॉन्ड 8 सितंबर 2020 को जारी किए गए थे। इस निर्णय से निवेशक अपने निवेश को पहले ही भुनाकर अच्छे लाभ का आनंद ले सकते हैं। रिडेम्प्शन मूल्य और लाभ कल, 6 सितंबर 2025 को, रिडेम्प्शन मूल्य ₹10,610 प्रति यूनिट तय किया गया है। यह ₹5,117 के मूल जारी मूल्य पर 107.35% का लाभ दर्शाता है। ध्यान दें कि इसमें बॉन्ड पर प्राप्त ब्याज शामिल नहीं है। रिडेम्प्शन मूल्य की गणना India Bullion and Jewellers Association (IBJA) द्वारा 3 व्यापारिक दिनों (3, 4, और 5 सितंबर 2025) के संपर्कित गोल्ड प्राइस के साधारण औसत के आधार पर की गई है। पूर्व समय पर रिडेम्प्शन के नियम SGB सामान्यतः 8 साल की अवधि के बाद भुगतान योग्य होते हैं। हालांकि, निवेशक बॉन्ड जारी होने के 5 वर्ष पूरे होने के बाद पूर्व समय पर रिडेम्प्शन कर सकते हैं। रिडेम्प्शन भुगतान अगली ब्याज भुगतान तिथि पर किया जाता है। इससे निवेशकों को मच्योरिटी से पहले निवेश निकालने की सुविधा मिलती है। SGB पर ब्याज द...

Sovereign Gold Bonds 2020-21 Series VI: RBI Announces Early Redemption, Investors to Gain Over 108%

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The Reserve Bank of India (RBI) has approved premature redemption of Sovereign Gold Bonds (SGBs) under the 2020-21 Series VI, which were originally issued on September 8, 2020. This decision allows investors to redeem their bonds early and enjoy significant returns. Redemption Price and Returns Yesterday 6th September, the redemption price has been fixed at ₹10,610 per unit, marking an impressive 107.35% gain over the issue price of ₹5,117. This gain is exclusive of the interest earned during the holding period. The redemption price was calculated based on the simple average of closing gold prices published by the India Bullion and Jewellers Association (IBJA) for three business days — September 3, 4, and 5, 2025. Premature Redemption Rules Under the SGB scheme: Bonds are normally repayable after 8 years from the issue date. Premature redemption is allowed after the fifth year of issuance, and repayments are made on the next interest payment date. This gives investors flexi...