Sovereign Gold Bonds 2020-21 Series VI: RBI ने घोषित की Early Redemption, निवेशकों को 108% तक लाभ
Reserve Bank of India (RBI) ने Sovereign Gold Bonds (SGBs) 2020-21 Series VI की पूर्व समय पर रिडेम्प्शन (Early Redemption) की अनुमति दे दी है। यह बॉन्ड 8 सितंबर 2020 को जारी किए गए थे। इस निर्णय से निवेशक अपने निवेश को पहले ही भुनाकर अच्छे लाभ का आनंद ले सकते हैं।
रिडेम्प्शन मूल्य और लाभ
कल, 6 सितंबर 2025 को, रिडेम्प्शन मूल्य ₹10,610 प्रति यूनिट तय किया गया है। यह ₹5,117 के मूल जारी मूल्य पर 107.35% का लाभ दर्शाता है। ध्यान दें कि इसमें बॉन्ड पर प्राप्त ब्याज शामिल नहीं है।
रिडेम्प्शन मूल्य की गणना India Bullion and Jewellers Association (IBJA) द्वारा 3 व्यापारिक दिनों (3, 4, और 5 सितंबर 2025) के संपर्कित गोल्ड प्राइस के साधारण औसत के आधार पर की गई है।
पूर्व समय पर रिडेम्प्शन के नियम
SGB सामान्यतः 8 साल की अवधि के बाद भुगतान योग्य होते हैं।
हालांकि, निवेशक बॉन्ड जारी होने के 5 वर्ष पूरे होने के बाद पूर्व समय पर रिडेम्प्शन कर सकते हैं।
रिडेम्प्शन भुगतान अगली ब्याज भुगतान तिथि पर किया जाता है।
इससे निवेशकों को मच्योरिटी से पहले निवेश निकालने की सुविधा मिलती है।
SGB पर ब्याज दर
SGB पर वार्षिक 2.5% की स्थिर ब्याज दर होती है, जो सेमी-एनीअली (छमाही) आधार पर सीधे निवेशक के बैंक खाते में जमा की जाती है। यह गोल्ड प्राइस से जुड़ी पूंजी वृद्धि के अलावा होता है, जिससे SGB दोहरा लाभ प्रदान करता है।
कर लाभ (Tax Benefits)
SGB पर प्राप्त ब्याज कर योग्य होता है।
रिडेम्प्शन पर पूंजीगत लाभ (Capital Gains) व्यक्तिगत निवेशकों के लिए कर मुक्त होता है।
Bond Transfer पर लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ पर Indexation लाभ उपलब्ध है।
इन लाभों के कारण SGB भौतिक सोने की तुलना में अधिक कर-कुशल निवेश बन जाता है।
Sovereign Gold Bond (SGB) क्या है?
SGB योजना को नवंबर 2015 में भारत सरकार ने शुरू किया था, ताकि लोग भौतिक सोने के बजाय वित्तीय विकल्पों में निवेश कर सकें।
बॉन्ड सोने के ग्राम में अंकित होते हैं।
निवेशक स्थिर ब्याज + गोल्ड प्राइस से जुड़ी पूंजी वृद्धि प्राप्त करते हैं।
योजना का उद्देश्य भारत के सोने के आयात पर निर्भरता घटाना, भंडारण कम करना, और घरेलू बचत को वित्तीय संपत्ति में लगाना था।
योजना क्यों बंद की गई?
अक्टूबर 2023 में नई SGB जारी नहीं की गई।
मुख्य कारण: योजना ने अपने उद्देश्य पूरे कर लिए।
Bond प्रबंधन और सर्विसिंग की लागत बढ़ना।
Gold ETFs और डिजिटल गोल्ड जैसी अन्य आसान निवेश विकल्प उपलब्ध होने लगे।
हालांकि, मौजूदा बॉन्ड वैध हैं, और निवेशक मच्योरिटी तक रख सकते हैं या पूर्व समय पर रिडेम्प्शन कर सकते हैं।
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