📜 स्वस्तिक का अर्थ और महत्व: धर्म, संस्कृति, ज्योतिष और वास्तु में इसका अमूल्य योगदान
🔱 प्रस्तावना स्वस्तिक — एक ऐसा प्राचीन मंगल-चिह्न, जिसे सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की कई सभ्यताओं ने सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना है। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि स्वस्तिक का वास्तविक अर्थ क्या है, इसका सांस्कृतिक, धार्मिक, ज्योतिष और वास्तुशास्त्र में क्या महत्व है, और क्यों इसे हर शुभ कार्य से पहले अंकित किया जाता है। --- 🔹 स्वस्तिक शब्द का अर्थ 'स्वस्तिक' संस्कृत के तीन अक्षरों से बना है — सु+अस+क सु का अर्थ — अच्छा, शुभ अस का अर्थ — सत्ता, अस्तित्व क का अर्थ — करने वाला इस प्रकार स्वस्तिक का सीधा अर्थ है — ‘शुभ या मंगल करने वाला’। अमरकोश में भी इसे ‘आशीर्वाद’ और ‘मंगल कार्य’ से जोड़ा गया है। स्वस्तिक केवल किसी एक जाति या धर्म का प्रतीक नहीं बल्कि वसुधैव कुटुम्बकम् — पूरे विश्व के कल्याण की भावना को दर्शाता है। --- 🔹 स्वस्तिक का स्वरूप और परम्परा स्वस्तिक की रचना दो सीधी रेखाओं से होती है, जो एक-दूसरे को काटते हुए मोड़ लेती हैं। यदि रेखाएँ दायीं ओर मुड़ती हैं, तो यह शुभ माना जाता है और यही पारंपरिक ‘स्वस्तिक’ है। यदि रेखाएँ बायीं ओर मुड़ती हैं,...