हम वो आख़िरी पीढ़ी हैं… बैलगाड़ी से इंटरनेट तक की यात्रा
प्रस्तावना “हम वो आख़िरी पीढ़ी हैं… जिसने बैलगाड़ी से लेकर इंटरनेट तक का सफ़र अपनी आँखों से देखा है।” ये केवल वाक्य नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की सच्चाई है। 1960 के दशक से लेकर 2025 तक का सफ़र ऐसा है जिसमें मिट्टी, खुशबू, रिश्ते और सादगी की छाप साफ झलकती है। --- 1. बैलगाड़ी से इंटरनेट तक हम वो लोग हैं जिन्होंने बैलगाड़ी, साइकिल, स्कूटर से सफ़र शुरू किया और आज इंटरनेट, सुपरसोनिक जेट और डिजिटल दुनिया तक पहुँच गए। --- 2. ख़त और चैटिंग का जादू एक दौर था जब बैरंग ख़त से दिल की बातें भेजी जाती थीं और जवाब का महीनों इंतज़ार होता था। आज वही बातें लाइव चैटिंग और वीडियो कॉल पर होती हैं। --- 3. मिट्टी की खुशबू और कहानियाँ मिट्टी के घरों में बैठकर परियों की कहानियाँ सुनना, ज़मीन पर बैठकर खाना खाना और प्लेट में चाय पीना — यही असली स्वाद था। --- 4. खेलों का असली मज़ा गिल्ली-डंडा, कंचे, खो-खो, कबड्डी और छुपन-छुपाई खेलने का मज़ा ही अलग था। आज की वीडियो गेम्स इन खेलों का विकल्प कभी नहीं बन सकतीं। --- 5. लालटेन और नॉवेल चाँदनी रातों में लालटेन की रोशनी में होमवर्क करना और चादर के नीचे छुपकर न...