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💖 अथाह प्रेम की पराकाष्ठा: जब अंत का ज्ञान होते हुए भी प्रेम अमर रहता है

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प्रस्तावना प्रेम केवल पाना नहीं है, बल्कि जीना है। अक्सर हम रिश्तों में प्रवेश करते समय उनके परिणाम को लेकर अनिश्चित होते हैं। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी होता है कि हमें शुरुआत से ही अंत का अंदाज़ा होता है, फिर भी हम पूरे दिल से प्रेम करते हैं। यही प्रेम की सच्ची परिभाषा और उसकी पराकाष्ठा (supreme stage of love) है। --- 🌹 जब अंत का ज्ञान भी प्रेम को रोक नहीं पाता “अंत मुझे शुरुआत से ही पता था, फिर भी तुम्हें अथाह प्रेम किया।” ये पंक्ति दर्शाती है कि प्रेम की शक्ति इतनी महान होती है कि वह भविष्य की अनिश्चितता या दर्द की परवाह नहीं करता। सच्चा प्रेम वर्तमान क्षण में जीता है और यही उसे दिव्य बनाता है। --- 💞 निष्काम प्रेम बनाम स्वार्थी प्रेम स्वार्थी प्रेम – जहाँ साथी को खोने का डर, अधिकार की भावना और अपेक्षाएँ हावी रहती हैं। निष्काम अथवा अथाह प्रेम – जहाँ न पाने का डर नहीं, केवल समर्पण होता है। यही प्रेम की पराकाष्ठा है। --- 🕊️ प्रेम का वास्तविक अर्थ प्रेम में त्याग होता है। प्रेम में धैर्य और स्वीकार्यता होती है। प्रेम में भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई होती है। प...