लालबाग़ का राजा : इतिहास, महत्व और मान्यता
गणेशोत्सव आते ही पूरे देश की नज़रें मुंबई की ओर जाती हैं, और चर्चा होती है सिर्फ़ एक नाम की – “लालबाग़ चा राजा”। लेकिन ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते कि लालबाग़ क्या है और लालबाग़ के राजा का इतिहास कैसे शुरू हुआ। लालबाग़ कहाँ है? मुंबई सात द्वीपों से मिलकर बना है – मज़गाँव, परेल, वर्ली, माहिम, कोलाबा, लिटिल कोलाबा और आइल ऑफ़ बॉम्बे। इनमें से परेल एक प्रमुख द्वीप था। यहाँ कभी लाल मिट्टी और आम-कटहल-सुपारी के बाग़ हुआ करते थे। इसी वजह से इस इलाके का नाम पड़ा लालबाग़। मिल मजदूरों का इलाका 1870 के बाद परेल और लालबाग़ का इलाक़ा कॉटन मिलों का गढ़ बन गया। करीब 600 एकड़ में फैली 130 से ज़्यादा मिलें हज़ारों मजदूरों की चॉलें 1982 में दत्ता सामंत के नेतृत्व में हुई सबसे बड़ी टेक्सटाइल स्ट्राइक बाद में मिलें बंद हो गईं और वहाँ अब बड़े-बड़े मॉल खड़े हो गए। इसीलिए लालबाग़, वर्ली और परेल का इलाका एक समय “गिरन गाँव” कहलाता था। बाज़ार से भगवान तक लालबाग़ के बीच पेरू चॉल के पास एक बाज़ार था, जिसे 1932 में नगरपालिका ने बंद कर दिया। मछुआरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका छिन गई। तब उन्होंने भगवान...