🌿 विपत्ति और ठोकर: जीवन के असली शिक्षक
प्रस्तावना कहा गया है— “विपत्ति से बढ़कर कोई विद्यालय, और ठोकर से बढ़कर कोई सबक़ नहीं होता।” जीवन में जब सब कुछ हमारी इच्छानुसार चलता है तो हम सीखना बंद कर देते हैं। लेकिन जब विपत्ति आती है, जब ठोकर लगती है, तभी असली शिक्षा मिलती है। विपत्ति: छिपा हुआ अवसर विपत्ति हमें हमारी सीमाओं से बाहर निकालती है। यह हमें धैर्य, साहस और संघर्ष की असली ताक़त सिखाती है। हर संकट अपने भीतर कोई न कोई अवसर छिपाए होता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति का व्यापार डूब जाए तो वह हार मानकर बैठ सकता है, या फिर उस असफलता से सीख लेकर और भी बेहतर व्यवसाय शुरू कर सकता है। ठोकर: जीवन की पाठशाला ठोकर हमें बताती है कि कौन-सा रास्ता सही नहीं है। यह हमारे अहंकार को तोड़कर हमें विनम्र बनाती है। ठोकर हमें सुधार का अवसर देती है। जिस इंसान ने जीवन में ठोकरें खाई हों, वही सफलता के मूल्य को सही मायने में समझ सकता है। क्यों ज़रूरी हैं ये दोनों? 👉 अगर जीवन में कभी विपत्ति न आए तो हम आराम की आदत में डूब जाएँगे। 👉 अगर ठोकर न लगे तो हमें सही और गलत का अंदाज़ा ही नहीं होगा। 👉 विपत्ति और ठोकर ही वो शिक्षक हैं जो हमें ब...