बंगाल का औद्योगिक पतन : एक गौरवशाली इतिहास से बेरोजगारी तक का सफर



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बंगाल का गौरवशाली अतीत

भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर औद्योगिक क्रांति तक, बंगाल हमेशा अग्रणी रहा।

कोलकाता (कलकत्ता) का जूट उद्योग पूरे विश्व में मशहूर था।

लाखों लोगों को रोजगार देने वाले इस उद्योग का अब नामोनिशान मिट चुका है।


उद्योगों का पतन और पलायन

👉 साइकिल इंडस्ट्री – बंगाल से लुधियाना (पंजाब) शिफ्ट।
👉 केमिकल प्लांट्स – कोलकाता से रायपुर (छत्तीसगढ़) चले गए।
👉 बैटरी इंडस्ट्री – मालदा और आसपास से महाराष्ट्र व गुजरात।
👉 ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री – हिंदुस्तान मोटर्स और अन्य कंपनियाँ बंद।
👉 सीमेंट इंडस्ट्री – आज बंगाल में एक भी फैक्ट्री नहीं बची।

उद्योगपतियों का पलायन

मारवाड़ी बिजनेसमैन जैसे खेतान, मुरारका, झुनझुनवाला, सेकसरिया, कुण्डलिया, गोयनका, नियोटिया, बिरला, बजाज आदि बंगाल छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान चले गए।

सिंगूर विवाद और टाटा मोटर्स

रतन टाटा की नैनो फैक्ट्री को ममता बनर्जी के विरोध का सामना करना पड़ा।

टाटा मोटर्स ने बंगाल छोड़कर गुजरात के सानंद में अपनी फैक्ट्री स्थापित की।

आज सानंद ऑटोमोबाइल और EV का वैश्विक हब बन चुका है।


आज का बंगाल : बेरोजगारी और पलायन

कभी रोजगार देने वाला बंगाल आज खुद मजदूर सप्लायर बन चुका है।

घरेलू नौकर

कंस्ट्रक्शन मजदूर

कबाड़ इकट्ठा करने वाले

छोटे-मोटे काम


गुजरात का अलंग शिप ब्रेकिंग हब इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ बंगाल से हजारों मजदूर काम करने जाते हैं।


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निष्कर्ष

कभी साहित्य, कला, नोबेल पुरस्कार और उद्योग का केंद्र रहा बंगाल आज बेरोजगारी और पलायन की मार झेल रहा है।
कम्युनिस्ट शासन और फिर तृणमूल कांग्रेस की नीतियों ने बंगाल को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ से वापसी कठिन दिखाई देती है।


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