फ्रांस के गणित प्रोफेसर फेड्रिक ब्रूनो ने अपनाया सनातन धर्म, महाकुंभ में बनेंगे 'ब्रूनो गिरी'
फ्रांस की प्रसिद्ध सारबोर्न यूनिवर्सिटी के गणित प्रोफेसर फेड्रिक ब्रूनो ने अपनी नौकरी छोड़कर सनातन धर्म अपनाने का फैसला किया है।
प्रोफेसर ब्रूनो का सनातन धर्म की ओर रुझान
फेड्रिक ब्रूनो, जिन्होंने वर्षों तक गणित के कठिन सिद्धांतों और अंकों के गुणा-भाग में अपनी जिंदगी बिताई, अब अध्यात्म की शांति और संतोष की तलाश में हैं। उनका कहना है,
"मैंने अंकों का खेल बहुत देख लिया, लेकिन अब मेरा मन सच्चे सुख और शांति की ओर खिंच रहा है।"
महाकुंभ में लेंगे जूना अखाड़े की दीक्षा
महाकुंभ 2025 के दौरान फेड्रिक ब्रूनो जूना अखाड़े के सन्यासी बनने जा रहे हैं। जूना अखाड़े के महंत घनानंद गिरी जी को उन्होंने अपना आध्यात्मिक गुरु स्वीकार किया है। दीक्षा के बाद वे 'ब्रूनो गिरी' के नाम से जाने जाएंगे।
परिवार के साथ सनातन धर्म की ओर कदम
फ्रांस के इस गणितज्ञ का यह कदम न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि उनके परिवार ने भी इसे अपनाने में सहमति दी है। पत्नी और तीन बच्चों के साथ गृहस्थ जीवन जीने वाले प्रोफेसर ब्रूनो का कहना है,
"यह सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि मेरे परिवार का भी जीवन बदलने वाला निर्णय है। हम सभी को सनातन धर्म की गहराई और इसकी आध्यात्मिकता ने प्रेरित किया।"
फेड्रिक ब्रूनो के फैसले की अनोखी कहानी
सारबोर्न यूनिवर्सिटी से लेकर अध्यात्म तक का सफर
गणित के प्रोफेसर से सन्यासी बनने की यात्रा
महाकुंभ और सनातन धर्म से जुड़ाव
महाकुंभ और जूना अखाड़े का महत्व
महाकुंभ मेला, जो विश्व का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है, हर 12 वर्षों में आयोजित होता है। यह आयोजन न केवल भारत के संतों और महात्माओं को जोड़ता है, बल्कि पूरी दुनिया से श्रद्धालु और जिज्ञासु इसे देखने आते हैं।
फेड्रिक ब्रूनो का इस महाकुंभ में जूना अखाड़े के सन्यासी के रूप में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की गहराई ने विदेशी विद्वानों को भी प्रभावित किया है।
निष्कर्ष:
फ्रांस के प्रोफेसर फेड्रिक ब्रूनो का गणित से अध्यात्म की ओर यह कदम न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भारतीय सनातन संस्कृति के प्रति वैश्विक आकर्षण को भी दर्शाता है। महाकुंभ 2025 के दौरान 'ब्रूनो गिरी' बनने वाले प्रोफेसर ब्रूनो आने वाले समय में अध्यात्म और सनातन धर्म के प्रचारक बन सकते हैं।
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