नई दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगों (1984 Anti-Sikh Riots) के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला उन दंगों के 40 साल बाद आया है, जिनमें हजारों निर्दोष सिख मारे गए थे।
क्या है पूरा मामला?
1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों, खासकर दिल्ली में, सिख समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे। इन दंगों में हजारों सिखों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे। सज्जन कुमार पर आरोप था कि उन्होंने दंगाइयों को उकसाया और हिंसा भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
कोर्ट का फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सज्जन कुमार को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा सुनाते हुए कहा कि, "ऐसे अपराध समाज के ताने-बाने को नष्ट करते हैं और न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है।" कोर्ट ने इसे "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" (Rarest of Rare) मामला करार देते हुए सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है।
पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया
सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने इस फैसले का स्वागत किया है। पीड़ितों के परिजनों ने कहा कि, "यह न्याय पाने की लंबी लड़ाई थी, जो अब जाकर पूरी हुई है।"
राजनीतिक प्रभाव और प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल है। भाजपा (BJP) और अकाली दल (Akali Dal) ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया, जबकि कांग्रेस (Congress) ने इससे दूरी बनाए रखने की कोशिश की है।
आगे क्या?
सज्जन कुमार के पास अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपील करने का विकल्प बचा है, लेकिन इस फैसले ने पीड़ितों के लिए न्याय की उम्मीद को जिंदा कर दिया है।
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