✍शिक्षक को उसकी छड़ी लौटा दीजिए, शिक्षक देश में अनुशासन लौटा देगा
भूमिका
समाज की नींव शिक्षा पर टिकी होती है और शिक्षा की आत्मा है शिक्षक। एक समय था जब गुरु के एक इशारे पर शिष्य अपनी पूरी निष्ठा से सीखने और अनुशासन में रहने को तत्पर रहते थे। लेकिन आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने गुरु के अधिकार और अनुशासन के साधनों को कम कर दिया है।
आज ज़रूरत है कि हम फिर से शिक्षक को उसका सम्मान और उसकी छड़ी लौटा दें — क्योंकि छड़ी केवल दंड का प्रतीक नहीं, बल्कि अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक है।
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अनुशासन क्यों है ज़रूरी?
बिना अनुशासन के शिक्षा अधूरी है।
अनुशासन इंसान को सही और गलत में भेद करना सिखाता है।
एक अनुशासित छात्र ही भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनता है।
समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार अनुशासित युवा शक्ति ही है।
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पहले के समय में गुरु का स्थान
भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊँचा स्थान दिया गया है –
"गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः।"
गुरु केवल पढ़ाते ही नहीं थे, बल्कि शिष्य को संस्कार, चरित्र और जीवन की दिशा भी देते थे। उनकी डाँट, उनकी छड़ी और उनका अनुशासन ही छात्रों को महान बनाता था।
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आज की शिक्षा व्यवस्था
आज बच्चों के अधिकारों और आधुनिक सोच के नाम पर गुरु का अधिकार कम कर दिया गया है। परिणामस्वरूप –
छात्र पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लेते।
मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय नष्ट करते हैं।
अनुशासन और संस्कार पीछे छूटते जा रहे हैं।
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समाधान – गुरु को अधिकार वापस दीजिए
👉 जब शिक्षक को उसका सम्मान और अनुशासन का अधिकार मिलेगा, तभी वह आने वाली पीढ़ी को सही मार्ग पर ला सकेगा।
👉 छड़ी का अर्थ यह नहीं कि शिक्षक हिंसा करे, बल्कि यह कठोरता में छिपी ममता और अनुशासन का प्रतीक है।
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निष्कर्ष
यदि हम चाहते हैं कि देश में फिर से संस्कार, मर्यादा और अनुशासन स्थापित हों, तो सबसे पहले हमें शिक्षक को उसका खोया हुआ अधिकार और सम्मान लौटाना होगा।
क्योंकि —
"शिक्षक को उसकी छड़ी लौटा दीजिए, शिक्षक देश में अनुशासन लौटा देगा।"
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