परिवार और रिश्तों में मौन और संवाद का महत्व
मौन क्यों?
पुरुषों का मौन कई बार उनकी कमजोरी नहीं बल्कि उनकी थकान, तनाव और मन की उलझनों को छिपाने का तरीका होता है। वे सोचते हैं कि बोलने से हालात बिगड़ेंगे, इसलिए चुप्पी साध लेते हैं।
शब्द क्यों?
स्त्रियाँ अक्सर अपने दर्द, भावनाएँ और शिकायतें शब्दों के माध्यम से व्यक्त करती हैं। जब रिश्तों में दूरी आती है तो वे बोलकर हल खोजने की कोशिश करती हैं।
समाधान क्या है?
रिश्तों को संभालने का सबसे अच्छा तरीका है – संवाद।
अपनी चुप्पी को तोड़ें।
भावनाओं को दबाकर न रखें।
शिकायतों को आरोप न बनने दें, बल्कि उन्हें समाधान का आधार बनाएं।
जब परिवार और रिश्तों में मौन और संवाद का संतुलन बन जाता है, तभी सच्ची नज़दीकियाँ लौटकर आती हैं।
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